हरिद्वार (haridwar loksabha seat) में राजनीतिक दिग्जजो के लिए वह सब कुछ है जो उन्हे अनुकूल लगता है, जिस प्रकार हरिद्वार का मौसम बदलता रहता है उसी प्रकार यहां की सियासत भी करवट बदलती रही है। हरिद्वार संसदीय सीट में आश्रम, मठ, गंगा तीर्थ हरकी पैड़ी एवं कलियर शरीफ समेत अनेक धार्मिक स्थल हैं।

राजाजी नेशनल पार्क पर्यटकों को आकर्षिक करता है तो महारत्न कंपनी बीएचईएल समेत औद्योगिक क्षेत्र विकास की कहानी बयां करता है। रुड़की आइआइटी, गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय, पतंजलि विवि, देव संस्कृति विवि आदि विख्यात शैक्षिक संस्थान हैं। यहां हर जाति, धर्म, वर्ग, समुदाय के लोगों का यहां गुलदस्ता है। शहरों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक आबादी निवास करती हैं। किसान राजनीति का गढ़ है तो देश-दुनिया में संत-महंतों की आवाज भी यहीं से बुलंद होती रही है।

1977 में अस्तित्व में आई लॉकसभा सीट

हरिद्वार सीट 1977 में अस्तित्व में आई। शुरू में इस सीट पर पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह का प्रभाव होने के कारण लोकदल का ही दबदबा रहा। अब तक इस सीट पर 13 आम चुनाव और एक उपचुनाव हुआ है। इसमें सबसे अधिक छह बार भाजपा, पांच बार कांग्रेस, दो बार लोकदल और एक बार समाजवादी पार्टी की जीत हुई है। कांग्रेस का गढ़ रही इस सीट पर 1991 के बाद भाजपा ने दबदबा बनाया। राज्य गठन के बाद 2004 में सपा और 2009 में कांग्रेस के पास हरिद्वार सीट रही। पिछले दो चुनाव से भाजपा का परचम है।

हरिद्वार सीट का इतिहास एक नजर में –

सालजीतेदल
1977 – 1980भगवान दास राठौरभारतीय लोकदल
1980 – 1984जगपाल सिंहजनता पार्टी सेक्युलर
1984 – 1987सुंदर लालकांग्रेस
1987 – 1989राम सिंहकांग्रेस
1989 – 1991जगपाल सिंहकांग्रेस
1991 – 1996राम सिंहभाजपा
1996 – 1998हरपाल सिंहभाजपा
1998 – 1999हरपाल सिंहभाजपा
1999 – 2004हरपाल सिंहभाजपा
2004 – 2009राजेंद्र कुमार बेदीसपा
2009 – 2014हरीश रावतकांग्रेस
2014 – अबतकरमेश पोखरियालभाजपा
सोर्स:- भारत निर्वाचन आयोग

हरिद्वार संसदीय सीट में दो जिलों के 14 विधासनभा क्षेत्र शामिल हैं। हरिद्वार जिले की हरिद्वार, भेल रानीपुर, ज्वालापुर, भगवानपुर, झबरेड़ा, पिरान कलियर, रुड़की, खानपुर, मंगलौर, लक्सर, हरिद्वार ग्रामीण और देहरादून जिले की ऋषिकेश, डोईवाला व धर्मपुर विधानसभा क्षेत्र इस लोकसभा में शामिल हैं। लोकसभा क्षेत्र में छह तहसील, एक उप तहसील व सात विकासखंड हैं। हरिद्वार संसदीय क्षेत्र में साधु समाज के साथ ही ब्राह्मण-पुरोहित, अनुसूचित जाति, पहाड़ी समाज, पाल, तेली, झोझा, बंजारा, पंजाबी-सिख, सिंधी, वैश्य, सैनी, जाट, गुर्जर, कुम्हार, त्यागी, आदि प्रेशर ग्रुप के रूप में हैं। मुस्लिम भी यहां समीकरण प्रभावित करने की स्थिति में रहते हैं।

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गुलशन आजाद, एक युवा पत्रकार है। जो अपराध एवं राजनितिक समेत समायिकी मुद्दो पर बिट करते है, पिछले 4 वर्षों से पत्रकारिता क्षेत्र में अपने योगदान से समाज को जागरूक करने में सक्रिय रहे हैं।

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