हरीद्वार। राज्य आंदोलनकारी भावना पांडे के भाजपा को अपना समर्थन देने के बाद हरीद्वार सीट पर बसपा ने यूपी से इंपोर्ट कर मौलाना जमील अहमद को लोकसभा प्रत्याशी बनाया है। राजनितिक विशेषज्ञों का कहना है कि बसपा का मौलाना कांग्रेस का खेल बिगाड़ सकता है।

“बसपा का मौलाना ऐसे बिगाड़ सकता है कांग्रेस का खेल”

हरिद्वार में उत्तराखंड राज्य गठन के बाद से ही बसपा,कांग्रेस व भाजपा इन तीनों पार्टी के बीच चुनाव होते आए हैं। लेकिन बसपा एक बार भी लोकसभा सीट पर अपना परचम नहीं लहरा सकी। भावना पांडे का बसपा ज्वाइन करना व फिर पार्टी को छोड़ देना और उसके बाद यूपी से पूर्व विधायक रहे मौलाना जमील को बसपा का लोकसभा टिकट होना अपने आप में एक नाटकिय घटनाक्रम है।

राजनीतिक विश्लेषण बताता है कि बसपा से लोकसभा सीट पर मुस्लिम चेहरे का मतलब सीधा कांग्रेस के वोट बैंक को डैमेज करना है हालांकि कुछ मीडिया रिपोर्ट तो यह भी दावा कर रही है कि बसपा ने मुस्लिम चेहरे को टिकट सिर्फ कांग्रेस को कमजोर करने के लिए दिया है और इसका ठोस कारण हरिद्वार लोकसभा सीट पर मुस्लिम वोट परसेंटेज का है।

“हरीद्वार लोकसभा सीट पर मुस्लिम- दलित फैक्टर”

हरिद्वार लोकसभा में कुल वोटर 18 लाख के करीब हैं। जिनमे लगभग 4.5 लाख मुस्लिम वोटर है व दलित वोटरों की संख्या 3.5 लाख से ज्यादा है। इसी दलित-मुस्लिम फैक्टर का नतीजा विधानसभा चुनाव में भी दिखा जिसके कारण हरीद्वार से बसपा के दो विधायक चुनाव जीतने में कामयाब रहे व अन्य कुछ सीटो पर ठीक ठाक वोट हासिल किया। अगर बसपा अपने कोर वोटर यानी दलितों का अगर 60 प्रतिशत वोट लेने में कामयाब रही और वहीं अगर बसपा को मुस्लिम 50 प्रतिशत के करीब वोट हासिल करने में कामयाब रहती है तो कांग्रेस प्रत्याशी वीरेंद्र रावत चुनाव मैदान में नहीं टिक पाएंगे।

“राजनीतिक अदावत: उमेश कुमार को चुनावी मैदान में भुगतनी पड़ सकती है कीमत”

राजनीतिक अदावत का खामियाजा उमेश कुमार को चुनावी मैदान में भुगतना पड़ सकता है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के स्टिंग का सिला कांग्रेस में एड़ी चोटी की ताकत लगाकर भी टिकट न मिलने के रूप में हासिल हुआ है। हालांकि इससे पहले भी टिकट की लालसा में उमेश कुमार की पत्नी सोनिया शर्मा बसपा में शामिल हुईं थी वहां जब तक कुछ हो पाता इससे पहले ही उन्होंने पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। हालंकि उमेश कुमार ने विधानसभा चुनाव में अपने प्रतिद्वंदी को अच्छे खासे मार्जिन से चुनाव मैदान में सिकसत दी थी। लेकिन लोकसभा चुनाव में इतना आसान नहीं है। उमेश कुमार को भी मुस्लिम वोट बैंक से अधिक उम्मीद है। लेकिन मौजूदा हालत को देखते हुए मुस्लिम वोट बैंक तीतर-बितर बिखर जाएगा और इसका लाभ सीधा भाजपा को पहुंचेगा।

वहीं कांग्रेस प्रत्याशी को हरदा के नाम पर 50 प्रतिशत से अधिक मुस्लिम वोट मुश्किल ही हासिल हो सकेगा। वही भाजपा को अपना कोर वोट बैंक मिलना ही मिलना है। फिलहाल तक चुनाव परिणाम भाजपा उम्मीद्वार त्रिवेंद्र सिंह रावत के पक्ष में जाता दिख रहा है।

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गुलशन आजाद, एक युवा पत्रकार है। जो अपराध एवं राजनितिक समेत समायिकी मुद्दो पर बिट करते है, पिछले 4 वर्षों से पत्रकारिता क्षेत्र में अपने योगदान से समाज को जागरूक करने में सक्रिय रहे हैं।

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